अगर सब कुछ एक दिन छूट जाना है,
तो मैं जीवन किसके लिए जी रहा हूँ?
इसी प्रश्न से भीतर की यात्रा शुरू होती है।
हो सकता है इस यात्रा में भगवान मिले या न मिले,
लेकिन इतना निश्चित है कि स्वयं से मुलाकात अवश्य होगी।
और शायद वही मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य है।