छात्रों पर लाठीचार्ज और प्रशासन की मनमानी के खिलाफ एबीवीपी का अल्टीमेटम: 48 घंटे में कार्रवाई की मांग

उन्नाव। 04 सितम्बर

श्री रामस्वरूप विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। हाल ही में विश्वविद्यालय परिसर में छात्र-छात्राओं द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जा रहा था, जिसका उद्देश्य संस्थान में व्याप्त शैक्षणिक और प्रशासनिक अनियमितताओं के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करना था। लेकिन इस शांतिपूर्ण आंदोलन का अंत अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से हुआ, जब पुलिस बल और कथित बाहरी असामाजिक तत्वों ने मिलकर छात्रों पर अचानक लाठीचार्ज कर दिया। इस हिंसक कार्रवाई ने न केवल छात्रों को शारीरिक और मानसिक रूप से आहत किया, बल्कि प्रदेशभर में छात्र समुदाय में रोष की भावना को जन्म दिया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने तीव्र विरोध दर्ज कराया है और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह कार्रवाई सोची-समझी साजिश के तहत की गई है, ताकि छात्रों की आवाज़ को दबाया जा सके। परिषद का कहना है कि जब छात्र अपने भविष्य, शिक्षा की गुणवत्ता और संस्थान में पारदर्शिता की मांग को लेकर लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे थे, तब उन पर बलपूर्वक हमला किया गया, जो संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों का खुला उल्लंघन है। इस हिंसक घटनाक्रम के बाद एबीवीपी ने विरोध स्वरूप जनआंदोलन का रास्ता अपनाया। परिषद के कार्यकर्ताओं ने मंत्री ओमप्रकाश राजभर द्वारा दिए गए विवादित और छात्रों की भावनाओं को आहत करने वाले बयान के विरोध में उनका पुतला दहन किया और इसके पश्चात जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में परिषद ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े किए हैं। एबीवीपी ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से शिक्षा की आड़ में अराजकता का माहौल है। न केवल वहां अवैध और बिना मान्यता के पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, बल्कि छात्रों से मनमाने ढंग से अत्यधिक फीस भी वसूली जा रही है। इतना ही नहीं, परिषद ने यह भी खुलासा किया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा छह बीघा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया गया है, जिसे तुरंत मुक्त कराए जाने की मांग की गई है। साथ ही कुछ छात्रों ने आरोप लगाया है कि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है और जबरन ऐसी गतिविधियों में शामिल होने के लिए बाध्य किया जा रहा है जो नैतिक और शैक्षणिक दृष्टि से अनुचित हैं।

इस पूरे मामले को लेकर एबीवीपी ने चार प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली और सबसे महत्वपूर्ण मांग है कि छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए तथा दोषी पुलिसकर्मियों, विश्वविद्यालय प्रशासन और घटना में शामिल बाहरी तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। दूसरी मांग के तहत परिषद ने यह आग्रह किया है कि विश्वविद्यालय में संचालित हो रहे सभी पाठ्यक्रमों की विधिवत जांच कराई जाए और जो पाठ्यक्रम किसी नियामक संस्था से मान्यता प्राप्त नहीं हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से बंद कराया जाए। इसके साथ ही फीस के नाम पर छात्रों से हो रही आर्थिक लूट की भी जांच होनी चाहिए। तीसरी मांग यह है कि छात्रों को डराने-धमकाने और उन्हें अनैतिक गतिविधियों में जबरन शामिल करने वालों की पहचान कर उन पर कठोर कानूनी कार्यवाही हो। चौथी और अंतिम मांग में परिषद ने स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय द्वारा कब्जाई गई छह बीघा सरकारी भूमि को अविलंब खाली कराया जाए और उसमें संलिप्त लोगों के खिलाफ भूमि हड़पने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की जाए।

एबीवीपी ने इस पूरे प्रकरण को केवल एक स्थानीय घटना के रूप में नहीं देखा है, बल्कि इसे प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार, अनियमितता और शोषण के खिलाफ एक व्यापक संघर्ष की शुरुआत बताया है। परिषद का कहना है कि यह आंदोलन न तो किसी राजनीतिक दल के इशारे पर किया जा रहा है और न ही इसका उद्देश्य कोई सस्ती लोकप्रियता हासिल करना है, बल्कि यह पूरी तरह छात्रहित, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए लड़ा जा रहा एक वैचारिक और नैतिक संघर्ष है। एबीवीपी ने प्रदेश सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं की गई, तो यह आंदोलन न सिर्फ ज़िले तक सीमित रहेगा, बल्कि इसे पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर फैलाया जाएगा। इसके लिए प्रदेश भर में विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्रों को mobilize किया जाएगा और एक व्यापक जनांदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

संगठन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि वे स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप करें और छात्रों को न्याय दिलाने के लिए ठोस और परिणामोन्मुखी कदम उठाएं। परिषद का कहना है कि सरकार की निष्क्रियता छात्रों में निराशा और आक्रोश को जन्म दे सकती है, जिससे भविष्य में और भी बड़े आंदोलन खड़े हो सकते हैं। एबीवीपी को उम्मीद है कि सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करेगी और शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, उत्तरदायी और छात्र-केंद्रित बनाएगी।

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