परम्परागत कारीगरों को मिलेगा नया अवसर: उन्नाव में खादी ग्रामोद्योग बोर्ड देगा निःशुल्क पॉपकॉर्न मेकिंग मशीन

उन्नाव, 20 सितंबर 2025
जिले के परम्परागत कारीगरों को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड ने एक विशेष योजना शुरू की है। इस योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 10 पॉपकॉर्न मेकिंग मशीनें निःशुल्क वितरित की जाएंगी। यह पहल मुख्यतः भुर्जी समाज के परम्परागत कारीगरों तथा इस उद्योग में रुचि रखने वाले अन्य पात्र लोगों को ध्यान में रखते हुए की गई है।

जिला ग्रामोद्योग अधिकारी संजीव कुमार सिंह ने बताया कि सरकार का प्रयास है कि छोटे और परम्परागत उद्योगों से जुड़े कारीगरों को आधुनिक साधनों से जोड़कर उन्हें रोजगार का स्थायी साधन उपलब्ध कराया जाए। पॉपकॉर्न मेकिंग मशीनें मिलने से कारीगरों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे और उनकी आय में भी वृद्धि होगी।

चयन प्रक्रिया समिति करेगी

जिला अधिकारी ने बताया कि मशीनों के वितरण के लिए लाभार्थियों का चयन निर्धारित चयन समिति द्वारा किया जाएगा। हालांकि अभी तक अपेक्षित संख्या में आवेदन पत्र प्राप्त नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञप्ति जारी होने के बाद भी यदि पर्याप्त आवेदन नहीं आते तो चयन की प्रक्रिया बाधित होगी। इस कारण उन्होंने सभी इच्छुक कारीगरों से अपील की है कि वे समय से आवेदन अवश्य करें।

आवेदन करने की अंतिम तिथि 24 सितंबर

इच्छुक कारीगरों को 24 सितंबर 2025 तक ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य है। इसके लिए आधिकारिक पोर्टल https://upkhaditoolkit.upsdc.gov.in/ पर जाकर टूल किट्स पंजीकरण एवं आवंटन विकल्प चुनना होगा। आवेदन के बाद पात्रता की जांच की जाएगी और चयन समिति की संस्तुति के बाद ही अंतिम सूची जारी होगी।

जरूरी दस्तावेज

जिला ग्रामोद्योग अधिकारी ने बताया कि आवेदन के समय लाभार्थियों को कुछ अनिवार्य दस्तावेज जमा करने होंगे। इनमें शामिल हैं –

  • जाति प्रमाण पत्र
  • आधार कार्ड
  • शैक्षिक योग्यता प्रमाण पत्र
  • मूल निवास प्रमाण पत्र
  • राशन कार्ड अथवा परिवार आईडी संख्या
  • तकनीकी या व्यवसायिक अनुभव प्रमाण पत्र
  • पासपोर्ट साइज फोटो और सक्रिय मोबाइल नंबर

इन सभी दस्तावेजों को ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने के बाद ही आवेदन स्वीकार किया जाएगा।

रोजगार का नया साधन

विशेषज्ञों का मानना है कि पॉपकॉर्न उद्योग ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में तेजी से बढ़ता हुआ छोटा व्यवसाय है। इसकी मांग निरंतर बनी रहती है और उत्पादन लागत अपेक्षाकृत कम होने से यह कारीगरों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की इस पहल से परम्परागत कारीगरों को न केवल आधुनिक उपकरण उपलब्ध होंगे बल्कि वे स्वयं का उद्यम भी स्थापित कर सकेंगे।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

जिला ग्रामोद्योग अधिकारी ने कहा कि यह योजना प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत अभियान तथा मुख्यमंत्री के स्वरोजगार को बढ़ावा देने के प्रयासों से जुड़ी हुई है। सरकार चाहती है कि परम्परागत कौशल को आधुनिक तकनीक से जोड़कर युवाओं और कारीगरों को स्थायी रोजगार मिले। पॉपकॉर्न मशीनें मिलने के बाद लाभार्थियों को स्थानीय बाजार से लेकर बड़े आयोजनों तक अपनी उत्पादकता बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

अपील

संजीव कुमार सिंह ने अंत में कहा कि –
“जिले के सभी पात्र कारीगर इस अवसर का लाभ उठाएं। यह योजना सीमित लाभार्थियों के लिए है, इसलिए जो भी इच्छुक हों वे 24 सितंबर तक अनिवार्य रूप से अपना पंजीकरण कराएं। समिति द्वारा चयनित 10 लाभार्थियों को निःशुल्क मशीनें दी जाएंगी, जिससे उनका जीवन स्तर और आजीविका दोनों बेहतर होंगी।”

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