उन्नाव।
उन्नाव जिले में मंगलवार शाम हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे प्रशासनिक अमले को हिला कर रख दिया है। शहर के कचहरी ओवरब्रिज पर एक तेज रफ्तार महिंद्रा XUV ने एक के बाद एक कई वाहनों को टक्कर मार दी, जिसमें बाइक सवार युवक निखिल गुप्ता (32) की मौत हो गई और ई-रिक्शा में सवार चार से अधिक लोग घायल हो गए। इस हादसे से जुड़ा सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब जांच में पता चला कि यह कार घाटमपुर की विधायक सरोज कुरील के नाम पर रजिस्टर्ड है।
लोगो ने मौके से VIP पास, BJP का झंडा और शराब-बियर की कई बोतलें भी बरामद कीं, जिससे हड़कंप मच गया है। घटना ने VIP संस्कृति, प्रशासनिक लापरवाही और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे का पूरा घटनाक्रम
घटना शाम क़रीब 6 बजे की है जब लखनऊ नंबर की महिंद्रा XUV तेज़ी से कचहरी पुल की ओर बढ़ रही थी। चश्मदीदों के मुताबिक, कार ने पहले एक ई-रिक्शा को जोरदार टक्कर मारी, फिर एक कार से टकराई और अंत में एक बाइक सवार को इतनी तेज़ टक्कर मारी कि वह पुल से नीचे रेलवे लाइन के पास जा गिरा।
बाइक सवार युवक की मौके पर ही मौत हो गई। उसकी पहचान मोहल्ला मोहनीबाग निवासी निखिल गुप्ता के रूप में हुई है, जो भाजपा नेता का भाई बताया जा रहा है। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए। घायल लोग सड़क पर करीब 40 मिनट तक तड़पते रहे, लेकिन 108 एम्बुलेंस समय से नहीं पहुंची, जिससे लोगों में आक्रोश और बढ़ गया।
विधायक ने माना: “हां, कार मेरी ही थी”
हादसे के बाद जब मीडिया ने पड़ताल शुरू की तो बड़ा खुलासा हुआ। “भारत समाचार” चैनल ने घाटमपुर से अपना दल (एस) की विधायक सरोज कुरील से फोन पर बात की। विधायक ने खुद स्वीकार किया कि,
“हां, हादसे में शामिल कार मेरी थी। मुझे घटना की जानकारी है। कार मेरा ड्राइवर मनीष तिवारी लेकर गया था।”
जब उनसे पूछा गया कि कार में शराब और बियर की बोतलें कैसे आईं, तो उन्होंने कहा,
“इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है।”
विधायक के इस बयान के बाद अब प्रशासन और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। क्या ड्राइवर नशे में था? क्या किसी और ने कार चलाई? क्या राजनीतिक रसूख के कारण मामले को दबाया जाएगा?
क्या कहती है पुलिस?
सदर कोतवाली पुलिस ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। कार को ज़ब्त कर लिया गया है और घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही एफआईआर दर्ज की जाएगी और जांच के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी।
हालांकि, अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, और ड्राइवर का पता नहीं चल पाया है।
हादसे ने खड़े किए कई बड़े सवाल
- VIP पास और BJP का झंडा लगी गाड़ी लापरवाही से शहर में किस अनुमति से घूम रही थी?
- कार में शराब-बियर की बोतलें किसकी थीं — क्या ड्राइवर नशे में था?
- घायलों को समय से मेडिकल सुविधा क्यों नहीं मिली?
- क्या यह मामला राजनीतिक दबाव में कमजोर किया जाएगा?
प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही
मौके पर मौजूद एक चश्मदीद युवक ने बताया,
“कार इतनी तेज थी कि हर कोई डर गया। पहले ई-रिक्शा को मारा, फिर बाइक वाले को इतनी जोर से टक्कर मारी कि वो सीधा नीचे रेलवे ट्रैक के पास जा गिरा। लोग चिल्लाते रहे, लेकिन एंबुलेंस आने में बहुत देर लगी।”
एक अन्य स्थानीय नागरिक ने कहा,
“कार में VIP पास और शराब की बोतलें देखकर लग रहा था कि कोई रसूखदार लोग थे। लेकिन ड्राइवर भाग गया। पुलिस ने भी शुरू में मामला दबाने की कोशिश की।”
उन्नाव की यह घटना सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सिस्टम की पोल खोलने वाली तस्वीर है। एक VIP पास लगी शराब से भरी गाड़ी से मासूम लोगों की जान जाना, घायल लोगों को समय से इलाज न मिलना और कार के मालिक के राजनीतिक रसूख — ये सब एक ऐसे सिस्टम की ओर इशारा करते हैं, जहां आम आदमी की जान की कीमत आज भी सबसे सस्ती है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती दिखाता है और क्या सच में दोषियों को सज़ा दिलाने में सफल होता है या एक बार फिर VIP कल्चर कानून पर भारी पड़ता है।


