ʺस्वदेशी आंदोलन को नई धार: उन्नाव से राष्ट्र को आत्मनिर्भरता का संदेशʺ

उन्नाव

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में स्वदेशी जागरण मंच के तत्वावधान में आयोजित एक विशेष बैठक में देश के समक्ष खड़ी आर्थिक, सामाजिक और वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए स्वदेशी अपनाओ और स्वावलंबी भारत के संदेश को विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर अवध प्रांत के प्रांत सह समन्वयक शिखर अवस्थी तथा उन्नाव जिले के जिला समन्वयक क्षितिज अग्निहोत्री ने सभा को संबोधित करते हुए स्वदेशी आंदोलन के महत्त्व को रेखांकित किया और उपस्थित जनसमूह से इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।

बैठक का आयोजन जिले के स्वदेशी जागरण मंच कार्यालय पर किया गया, जिसमें जिले के प्रमुख व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि, सामाजिक संगठन के पदाधिकारी, शिक्षाविद, उद्यमी, युवावर्ग और समाज के अन्य प्रबुद्धजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय समाज को यह समझाना था कि कैसे स्वदेशी अपनाना केवल एक आर्थिक विकल्प नहीं, बल्कि यह एक सांस्कृतिक, राष्ट्रीय और सामरिक आवश्यकता है, जो भारत को न केवल आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि वैश्विक मंच पर भी भारत की स्थिति को और मजबूत करेगी।

प्रांत सह समन्वयक शिखर अवस्थी ने अपने ओजस्वी संबोधन में बताया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और चीन के बीच व्यापारिक असंतुलन अत्यधिक बढ़ गया है। आज भारत का व्यापार घाटा चीन के साथ 99.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर के चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुका है। यह घाटा न केवल भारत की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर रहा है, बल्कि इसके कारण भारतीय बाजारों में विदेशी सस्ते और घटिया सामानों की भरमार हो गई है। इससे न केवल स्थानीय एमएसएमई सेक्टर को भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि लाखों लोगों की रोजगार की संभावनाएं भी खत्म हो रही हैं। उन्होंने कहा कि यह समय है जब हम भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दें और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करके ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को जीवन में उतारें।

शिखर अवस्थी ने यह भी कहा कि भारत की असली शक्ति उसकी जनसंख्या, युवाशक्ति, प्राकृतिक संसाधनों और उद्यमशीलता में छिपी हुई है। यदि इन क्षेत्रों का समुचित उपयोग किया जाए तो भारत एक महाशक्ति के रूप में उभर सकता है। उन्होंने चीन के कथित आर्थिक वर्चस्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि चीन का उद्देश्य केवल व्यापार करना नहीं है, बल्कि भारतीय उत्पादन तंत्र को कमजोर करना और बाज़ारों को अपने अधीन करना भी उसका छिपा हुआ एजेंडा है। ऐसे में प्रत्येक भारतीय का यह दायित्व बनता है कि वह राष्ट्रहित में स्वदेशी उत्पादों को अपनाकर देश की आर्थिक नींव को मजबूत बनाए।

जिला समन्वयक क्षितिज अग्निहोत्री ने वैश्विक परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आज की दुनिया में वैश्वीकरण के नाम पर जिस तरह से व्यापारिक संबंधों को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, वह चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं, भुगतान प्रणालियों और मुद्राओं को आज आर्थिक हथियार की तरह उपयोग किया जा रहा है, जिससे विकासशील राष्ट्रों पर दबाव बनाया जा रहा है। अमेरिका, चीन और अन्य पश्चिमी देशों द्वारा संरक्षणवाद की नीति अपनाई जा रही है, जहां टैरिफ वॉर, नॉन-टैरिफ बैरियर्स और अन्य व्यापारिक प्रतिबंधों के ज़रिए वैश्विक व्यापार को नियंत्रित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि चीन, जो स्वयं अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए स्वदेशी और आत्मनिर्भरता पर ज़ोर देता है, वह भारत में सस्ते और निम्न गुणवत्ता के उत्पाद भेजकर भारतीय बाजारों को पंगु बनाने का प्रयास करता है। ऐसे में स्वदेशी आंदोलन सिर्फ एक आर्थिक विकल्प नहीं, बल्कि यह भारत की संप्रभुता और सम्मान की रक्षा का भी माध्यम है। क्षितिज अग्निहोत्री ने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दें, चाहे वह दैनिक उपयोग की वस्तुएं हों, वस्त्र हों, इलेक्ट्रॉनिक्स या निर्माण सामग्री — हर क्षेत्र में भारतीय उत्पादन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

बैठक में यह भी बताया गया कि स्वदेशी जागरण मंच द्वारा दिनांक 12 जून 2025 से ‘स्वदेशी सुरक्षा एवं स्वावलंबन अभियान’ की शुरुआत की गई है, जिसे देश भर में व्यापक समर्थन प्राप्त हो रहा है। इस अभियान के अंतर्गत मंच ने व्यापारियों, उत्पादकों, कारीगरों, स्टार्टअप्स, छात्रों, महिलाओं और युवाओं को जोड़ने का बीड़ा उठाया है, जिससे यह आंदोलन एक व्यापक जन-जागरण बन सके। इस अभियान के माध्यम से स्वदेशी उत्पादों की प्रदर्शनी, प्रचार, स्थानीय बाजारों को सशक्त बनाने की कार्यशालाएं, स्कूलों और कॉलेजों में व्याख्यान, ग्राम स्तर पर जनसभाएं तथा सोशल मीडिया अभियान जैसे कई पहलुओं पर काम किया जा रहा है।

कार्यक्रम में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी स्वदेशी उत्पादों को अपनाने, स्थानीय उत्पादकों को बढ़ावा देने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत को एक सशक्त राष्ट्र के रूप में खड़ा करने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग से सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि आज भारत की युवा पीढ़ी के पास तकनीक, ऊर्जा और नवाचार की क्षमता है। यदि उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में सही मार्गदर्शन दिया जाए, तो भारत न केवल आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि वह विश्व को नेतृत्व देने वाला राष्ट्र भी बन सकता है।

बैठक के अंत में मंच के पदाधिकारियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, व्यापारिक संघों और नागरिकों ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि वे विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करेंगे, स्वदेशी उत्पादों को अपनाएंगे और स्वावलंबी भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देंगे। सभी ने एक स्वर में यह उद्घोष किया — “स्वदेशी ही राष्ट्र सेवा है, स्वदेशी ही समाधान है”।

इस कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि आज की आवश्यकता केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा को आत्मनिर्भरता के सूत्र में बांधने की है। उन्नाव की इस ऐतिहासिक बैठक ने न केवल जिले में एक नई चेतना का संचार किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि भारत का भविष्य स्वदेशी के रास्ते से होकर ही आगे बढ़ेगा।

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