लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण सड़कों में से एक है। इस मार्ग का इस्तेमाल रोज़ाना हज़ारों वाहन करते हैं। लेकिन शुक्रवार की बीती रात यात्रियों के लिए यह सफर बेहद कठिन साबित हुआ, जब रेवरी टोल प्लाजा पर अचानक सर्वर डाउन हो गया। इस तकनीकी खराबी के कारण एक्सप्रेसवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं।
रात 9 बजे शुरू हुआ संकट
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुक्रवार रात करीब 9 बजे हसनगंज बॉर्डर पर स्थित रेवरी टोल प्लाजा पर सर्वर ने काम करना बंद कर दिया। सर्वर डाउन होते ही टोल प्लाजा पर वाहनों का संचालन पूरी तरह से ठप हो गया। टोल से गुजरने वाले वाहनों का शुल्क काटा नहीं जा पा रहा था, जिसके कारण धीरे-धीरे ट्रैफिक का दबाव बढ़ता गया। देखते ही देखते दोनों तरफ करीब तीन किलोमीटर लंबा जाम लग गया।
इस जाम में सिर्फ निजी गाड़ियां ही नहीं, बल्कि कई वीआईपी वाहन और एम्बुलेंस भी फंस गईं। एम्बुलेंस के फंसने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, आम राहगीर भी घंटों तक जाम में फंसे रहे और थकान से बेहाल होते रहे।

घंटों फंसे रहे राहगीर
राहगीरों का कहना था कि इस दौरान किसी तरह की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। टोल कर्मियों द्वारा मैनुअल तरीके से भी वाहनों को निकालने का प्रयास नहीं किया गया, जिससे लोगों को और अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई लोग अपने गंतव्य तक देर रात ही पहुंच पाए।
यात्रियों ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि जब देश भर में टोल टैक्स पूरी तरह डिजिटल हो चुका है, तो इस तरह की तकनीकी खामियों से बचने के लिए वैकल्पिक इंतज़ाम होना चाहिए।

टोल मैनेजर ने दी सफाई
मामले पर टोल मैनेजर नितिन कुमार ने बताया कि यह समस्या सर्वर डाउन होने की वजह से आई थी। सर्वर में आई तकनीकी खराबी को ठीक करने में करीब दो घंटे का समय लगा। रात करीब 11 बजे सर्वर दोबारा शुरू हुआ तो धीरे-धीरे जाम की स्थिति से निजात मिल सका।
नितिन कुमार ने स्वीकार किया कि सर्वर डाउन होने के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि समस्या का समाधान मिलते ही टोल कर्मियों ने पूरी सक्रियता से वाहनों को पास कराया और जाम को खत्म किया।

लोगों में नाराज़गी, उठे सवाल
इस घटना के बाद लोगों में काफी नाराज़गी देखने को मिली। यात्रियों ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी स्थिति में एम्बुलेंस और अन्य इमरजेंसी वाहनों को निकालने के लिए ठोस योजना क्यों नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से भविष्य में बचने के लिए टोल प्लाजा पर बैकअप सर्वर और मैनुअल व्यवस्था दोनों का होना बेहद जरूरी है।
यूपी एक्सप्रेसवे पर बढ़ता दबाव
गौरतलब है कि लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे राज्य का सबसे तेज़ और सुरक्षित मार्ग माना जाता है। इस पर रोज़ाना हजारों वाहन दौड़ते हैं। ऐसे में तकनीकी खामियों के कारण यातायात प्रभावित होना गंभीर चिंता का विषय है। यात्रियों का कहना है कि सरकार और टोल प्रबंधन को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति न बने।
शुक्रवार रात की यह घटना एक बड़ी लापरवाही के रूप में सामने आई है। लगभग दो घंटे तक यात्री, वीआईपी वाहन और यहां तक कि एम्बुलेंस भी जाम में फंसी रहीं। यह स्थिति न केवल अव्यवस्था को उजागर करती है बल्कि आम जनता की सुरक्षा और सुविधा पर भी सवाल खड़े करती है। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस घटना से सबक लेकर भविष्य के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
