उन्नाव।
मौरावां नगर पंचायत में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का मुद्दा एक बार फिर गहराता जा रहा है। नगर पंचायत के सभासदों ने अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। सभासदों का कहना है कि बीते दो से तीन महीनों में कराए गए विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की गई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
सभासदों ने आरोप लगाया कि विकास कार्य बिना बोर्ड बैठक कराए और बिना सभासदों की सहमति के कराए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, कुछ प्रस्तावों को कागजों में पारित दिखा दिया गया है, जबकि हकीकत में संबंधित बैठकें आयोजित ही नहीं की गईं। इससे नगर पंचायत की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

विकास कार्यों की गुणवत्ता पर उठे सवाल
सभासदों ने डीएम को सौंपे गए ज्ञापन में कहा है कि नगर पंचायत मौरावां में बीते 2–3 महीनों में सड़कों, नालियों, पाइपलाइन, बोरिंग और इंटरलॉकिंग जैसे कार्य कराए गए हैं। इन कार्यों की गुणवत्ता बेहद खराब है। आरोप है कि मानकों की अनदेखी करते हुए ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों ने घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया, जिससे ये निर्माण कार्य लंबे समय तक टिक नहीं पाएंगे।

बिना बोर्ड बैठक के कराए गए कार्य
सभासदों का दूसरा बड़ा आरोप यह है कि नगर पंचायत अध्यक्ष ने कई कार्यों को बोर्ड बैठक के बिना ही स्वीकृत कराकर करा लिया। जबकि नियमानुसार किसी भी विकास कार्य को कराए जाने से पहले बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास होना अनिवार्य है। सभासदों ने आरोप लगाया कि कार्यवाही पुस्तिका में फर्जी हस्ताक्षर दिखाकर प्रस्ताव पारित दर्शाए गए हैं।

सोलर लाइट और हाईमास्ट लाइट में गड़बड़ी
ज्ञापन में कहा गया है कि नगर पंचायत क्षेत्र में सोलर लाइट और हाईमास्ट लाइट की खरीद में भारी अनियमितता की गई। संसद निधि और नगर पंचायत के बजट से लगाए गए उपकरणों की लागत और गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए हैं। सभासदों ने आरोप लगाया कि जहां 250 वाट की बैटरी होनी चाहिए थी, वहां 180 वाट की बैटरी लगाई गई है। इसके बावजूद भुगतान पूरा किया गया। साथ ही, रामनगर वार्ड में लगी हाईमास्ट लाइट खराब होने के बाद भी मरम्मत न कराकर दोबारा नई लाइट खरीद ली गई, जिससे भ्रष्टाचार की बू आती है।

इंटरलॉकिंग टाइल्स और निर्माण कार्यों पर प्रश्नचिह्न
सभासदों ने कहा कि नगर पंचायत क्षेत्र में कराई गई इंटरलॉकिंग टाइल्स घटिया स्तर की हैं। जगह-जगह टाइल्स उखड़ने लगी हैं और सीमेंट की गुणवत्ता भी मानक के अनुरूप नहीं है। इसके अलावा नालियों का निर्माण भी अव्यवस्थित ढंग से हुआ है। पानी निकासी की उचित व्यवस्था न होने से बारिश में जलभराव की समस्या बनी रहती है।

मेला समिति और ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेन-देन पर आरोप
सभासदों ने यह भी आरोप लगाया कि नगर पंचायत अध्यक्ष ने मेला समिति और मोतीलाल ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय मामलों में पारदर्शिता नहीं बरती। मेला समिति के बजट से किए गए खर्चों का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं है। वहीं, ट्रस्ट की आय-व्यय संबंधी जानकारी को भी गुप्त रखा गया है। इससे भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ी की आशंका और बढ़ गई है।

आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से वसूली का आरोप
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि नगर पंचायत कार्यालय में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से जबरन वसूली की जा रही है। कर्मचारियों पर दबाव बनाकर उनसे निर्धारित राशि वसूल की जाती है। सभासदों का कहना है कि यह स्थिति न केवल अवैध है बल्कि कर्मचारियों में असंतोष भी पैदा कर रही है।

कुल 11 बिंदुओं पर विस्तृत जांच की मांग
सभासदों ने ज्ञापन में कुल 11 बिंदु गिनाते हुए इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराए जाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते जांच नहीं हुई तो नगर पंचायत के विकास कार्य पूरी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएंगे और जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
सभासदों के हस्ताक्षर से मजबूती मिली शिकायत को
ज्ञापन पर नगर पंचायत के कई सभासदों के हस्ताक्षर मौजूद हैं, जिनमें –
- प्रिया सेठ (सभासद वार्ड 3 )
- साधना देवी (सभासद वार्ड 5)
- पंकज लोधी (सभासद वार्ड 10)
- आशीष कुमार (सभासद वार्ड 8)
- सुलतान बेग (सभासद वार्ड 9)
- अमर नाथ (सभासद वार्ड 2)
शामिल हैं। इन सभी ने मिलकर डीएम से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
पूर्व में भी विवादों में घिरे रहे अध्यक्ष
गौरतलब है कि मौरावां नगर पंचायत अध्यक्ष पहले भी कई बार विवादों में रहे हैं। उन पर पहले भी भ्रष्टाचार और मनमाने तरीके से काम कराने के आरोप लग चुके हैं। अब एक बार फिर सभासदों ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। इससे नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग गया है।
डीएम से की निष्पक्ष जांच की अपील
सभासदों ने डीएम और एडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए अनुरोध किया कि इन 11 बिंदुओं पर गंभीरता से जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि जांच नहीं हुई तो भ्रष्टाचार और बढ़ जाएगा और नगर पंचायत के विकास कार्य प्रभावित होंगे। सभासदों ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो वे आंदोलन का रास्ता भी अपनाएंगे।
जनता की उम्मीदें और पारदर्शिता का सवाल
इस पूरे मामले ने नगर पंचायत मौरावां की पारदर्शिता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता उम्मीद करती है कि उनके टैक्स और राजस्व से इकट्ठा की गई राशि सही तरीके से विकास कार्यों पर खर्च हो। लेकिन यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह विश्वास पूरी तरह टूट जाएगा। अब निगाहें जिला अधिकारी की कार्रवाई पर टिकी हैं कि वे इस मामले में किस तरह कदम उठाते हैं।
