उन्नाव
उन्नाव जिले में सोशल मीडिया के ज़रिए अश्लीलता फैलाने और समाज में विकृत मानसिकता का प्रदर्शन करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने न केवल स्थानीय प्रशासन को चौकन्ना कर दिया, बल्कि समाज के सभी जागरूक वर्गों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर डिजिटल मंचों पर युवा वर्ग किस दिशा में जा रहा है। ताजा घटनाक्रम में तीन युवकों ने मिलकर एक ऐसी वीडियो रील बनाई, जिसमें सार्वजनिक मर्यादाओं की घोर अवहेलना करते हुए गालियों और भद्दे शब्दों की भरमार थी। वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक रूप से अपलोड किया गया, जिससे यह देखते ही देखते वायरल हो गई और हजारों लोगों तक पहुंच गई। वीडियो की सामग्री इस कदर अश्लील और आपत्तिजनक थी कि इसकी आलोचना आम लोगों से लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं तक ने की।
यह वीडियो इंस्टाग्राम जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर Shyam_bhai_3535 और Rahul_Jaykar_3535 नामक अकाउंट्स से डाली गई थी, जहां इसने बहुत कम समय में काफी लोकप्रियता हासिल कर ली। लेकिन यह लोकप्रियता सकारात्मक नहीं, बल्कि नकारात्मक असर पैदा करने वाली थी, क्योंकि वीडियो में इस्तेमाल की गई भाषा न केवल सामाजिक मूल्यों के खिलाफ थी, बल्कि युवाओं के लिए भी एक ग़लत उदाहरण पेश कर रही थी। यह देखा गया है कि इस तरह की वीडियो अक्सर युवा वर्ग में 'ट्रेंड' बनने लगती हैं, और उनका उद्देश्य केवल मनोरंजन न होकर, फॉलोअर्स और लाइक्स बटोरने की मानसिकता से प्रेरित होता है। लेकिन यह एक खतरनाक प्रवृत्ति है, जो समाज में वैचारिक प्रदूषण को जन्म देती है।
वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद, जनपद उन्नाव के थाना अजगैन पुलिस सक्रिय हुई और जांच-पड़ताल शुरू की। तकनीकी निगरानी और स्थानीय मुखबिर तंत्र की सहायता से पुलिस ने इन युवकों की पहचान की और उन्हें हिरासत में ले लिया। गिरफ्तार किए गए युवकों की पहचान ग्राम कुसुम्भी थाना अजगैन के निवासी राहुल पुत्र राम सजीवन (उम्र 21 वर्ष), हिमांशू पुत्र शिव कुमार (22 वर्ष) और श्याम जी पुत्र देवी चरण (20 वर्ष) के रूप में हुई है। इन युवकों के विरुद्ध थाना अजगैन में FIR दर्ज की गई और इसके तहत विधिवत रूप से कानूनी कार्रवाई करते हुए इन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में इन युवकों ने बताया कि उन्होंने यह वीडियो केवल "मजाक के लिए" बनाई थी, लेकिन कानून के नज़रिए से यह कोई मजाक नहीं था। पुलिस ने बताया कि इस मामले में एक और युवक – अमन पुत्र किशन, निवासी उन्नाव – की संलिप्तता पाई गई है, जो वीडियो निर्माण व पोस्टिंग में सक्रिय रूप से शामिल था। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है और जल्द ही उसे भी न्यायिक प्रक्रिया में लाया जाएगा। इस पूरे अभियान में उपनिरीक्षक मोहम्मद कल्लन और हेड कांस्टेबल संजेश कुमार की भूमिका उल्लेखनीय रही, जिन्होंने तकनीकी साक्ष्यों और ग्राउंड इंटेलिजेंस का कुशलतापूर्वक उपयोग कर आरोपियों को ट्रैक किया।
इस घटना को लेकर उन्नाव पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट और सख्त संदेश जारी किया है कि सोशल मीडिया किसी भी हाल में अभद्रता और सामाजिक अव्यवस्था फैलाने का मंच नहीं है। यदि कोई व्यक्ति समाज में वैमनस्य फैलाने, युवाओं को ग़लत दिशा में ले जाने या सांस्कृतिक मर्यादाओं का उल्लंघन करता है, तो उसे कानूनी प्रक्रिया का सामना करना ही पड़ेगा। पुलिस का कहना है कि भविष्य में भी यदि इस प्रकार की वीडियो या सामग्री सामने आती है, तो बिना किसी विलंब के ऐसी पोस्ट करने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी, चाहे वे किसी भी क्षेत्र या आयु वर्ग के क्यों न हों।
यह घटना केवल एक गिरफ्तारी भर नहीं है, बल्कि यह सोशल मीडिया के बढ़ते दुरुपयोग और समाज में वायरल संस्कृति के नाम पर हो रही मानसिक व नैतिक गिरावट का गंभीर उदाहरण है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि आज की युवा पीढ़ी में एक बड़ा वर्ग ध्यान आकर्षित करने और लोकप्रियता पाने की होड़ में इस हद तक जाने को तैयार है कि वे कानून, समाज और नैतिकता – तीनों को ताक पर रख देते हैं। लेकिन अब प्रशासन भी यह सुनिश्चित करने में जुट गया है कि ऐसे प्रयासों को समय रहते रोका जाए और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अनुशासन और मर्यादा बनाए रखी जाए।
उन्नाव जैसी सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध भूमि पर इस प्रकार की घटनाएं निश्चित ही चिंता का विषय हैं। यह आवश्यक हो गया है कि परिजनों, शिक्षकों और समाज के प्रबुद्ध वर्गों की भूमिका और अधिक मजबूत हो, ताकि युवाओं को सही दिशा में प्रेरित किया जा सके और वे सोशल मीडिया को केवल एक मनोरंजन का नहीं, बल्कि रचनात्मकता और ज्ञान के माध्यम के रूप में उपयोग करना सीखें। साथ ही, यह भी जरूरी है कि सरकार और प्रशासन ऐसे मामलों पर तुरंत और कठोर कार्रवाई कर एक मिसाल कायम करे, ताकि अन्य लोग ऐसा करने से पहले सौ बार सोचें।
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